ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि किसी व्यक्ति के जन्म के समय में आकाश में ग्रह और नक्षत्र जिस स्थिति में होते हैं, उसी के आधार पर उसकी जन्म कुंडली बनाई जाती है. किसी ज्योतिषि को व्यक्ति की कुंडली दिखाकर उसके जीवन में होने वाली सभी घटनाओं की जानकारी पता की जा सकती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में कई तरह के शुभ और अशुभ दोनों ही योगों का निर्माण होता है.
व्यक्ति की जन्म कुंडली में बनने वाले शुभ योगों की वजह से उसका जीवन सुखमय बितता है. धन-धान्य की कमी नहीं रहती. थोड़ी कोशिशों से ही सफलता हासिल हो जाती है. वहीं कुंडली में बनने वाले अशुभ योग की वजह से व्यक्ति को जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आज हम आपको कुंडली में लगने वाले पृत दोष के बारे में बताने जा रहे हैं. जिन व्यक्तियों की कुंडली में पृत दोष लग जाता है, उनको धन हानि, बिमारी, परिवार में क्लेश और अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कुंडली में पितृ दोष कैसे लगता है. इससे बचने के उपाय क्या हैं.
जब सूर्य, मंगल और शनि किसी व्यक्ति के लग्न भाव और पांचवें भाव में हो तो पितृ दोष लग जाता है. इसके अलावा गुरु और राहु के एक साथ अष्टम भाव में आ जाने से पितृ दोष का निर्माण होता है. जन्म कुंडली में राहू केंद्र या त्रिकोण में हो तो भी पितृ दोष लगता है. वहीं सूर्य, चंद्रमा और लग्नेश का राहु से संबंध होने पर भी व्यक्ति को पितृ दोष का सामना करना पड़ता है.
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